बुन्देलखण्ड ललितपुर

भारतीय संस्कृति की रक्षा एवं पर्यावरण संरक्षण हेतु यज्ञ आवश्यक

ललितपुर। नगर के पुलिस लाइन स्थित सुप्रसिद्ध मुक्तिधाम मंदिर में नवरात्रि के पावन अवसर पर आयोजित श्रीमद भागवत सप्ताह ज्ञानयज्ञ के छठवें दिन श्रीमद भागवत के विद्वान डा.ओमप्रकाश शास्त्री ने श्रद्धालु जनमानस को सम्बोधित करते हुए कहा कि करोड़ो वर्ष प्राचीन भारतीय संस्कृति में यज्ञों का सृष्टि के आदिकाल से महत्व रहा है। भगवान प्रजापति ब्रहृमा ने सृष्टि के संतुलन एवं मानव जीवन के कल्याणार्थ एक हजार आठ प्रकार के यज्ञों का प्रतिपादन वेदों में किया है। डा.शास्त्री ने कहा कि यज्ञीय संस्कृति की रक्षा के लिए परमात्मा ने अवतार धारण कर स्वयं यज्ञ सम्पन्न कर यज्ञ को प्रतिष्ठित किया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जब चारों ओर पर्यावरण प्रदूषण से सम्पूर्ण मानव जाति का एवं जीवधारियों का अस्तित्व खतरे में है। वैदिक यज्ञों द्वारा हम पर्यावरण को शुद्ध कर सकते हैं। यज्ञीय धूम से जहां वायुमंडल शुद्ध होता है वहीं यज्ञों में प्रयुक्त वेदमंत्रों से सामाजिक, सांस्कृतिक, वातावरण में शुद्धता आती है। उन्होंने कहा कि बुन्देलखण्ड का प्राचीन नाम जुहोति क्षेत्र है। यहां के निवासी प्राचीनकाल में प्रतिदिन यज्ञ हवन करते थे। अत: यहां की पावन धरा की संस्कृति यज्ञ प्रधान थी। यहां कभी भी सूखा नहीं होता था। जब से हम यज्ञों को भूल गये तब से कभी -कभी सूखा पड़ जाता है। डा.शास्त्री ने जनता जर्नादन से आहृवान किया कि वे अपने घरों में प्रतिदिन हवन कर वैदिक संस्कृति का अनुसरण कर सुख समृद्धि प्राप्त करें।