बुन्देलखण्ड ललितपुर

दया से धर्म विशुद्ध होता है : आचार्यश्री

ललितपुर। दयोदय गौशाला मसौरा परिसर में संत शिरोमणि राष्ट्रसंत आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज ससंघ के सान्निध्य में चल रहे श्रीमज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा एवं गजरथ महामहोत्सव में शुक्रवार को तीर्थंकर भगवान का मोक्षकल्याणक भारी आस्था श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर दोपहर में 1.30 बजे से गजरथ महोत्सव का आयोजन किया गया जिसमें आस्था का अपार जनसैलाव उमड़ पड़ा। शुक्रवार को मोक्षकल्याणक की क्रियाओं में पात्र शुद्धि, अभिषेक, शन्तिधारा, नित्य महापूजन के साथ आरंभ हुयीं। तीर्थंकर आदिनाथ को सुबह 7.35 बजे मोक्ष की प्राप्ति हुई। जैसे ही तीर्थंकर भगवान के मोक्ष जाने की घोषणा की गयी तो उपस्थित हजारों भक्तों ने जयकारों से आकाश गुंजायमान कर दिया। लोग खुशी से नृत्य करने लगे। विविध प्रकार के वाद्ययंत्र बजाए गए। भगवान के नख, केश, पिच्छि, कमण्डल तथा काजल की डिबिया, आभूषण, झारी, सलाई, बाजूबंद आदि को प्राप्त करने का सौभाग्य श्रेष्ठियों ने अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग प्राप्त किया। आचार्यश्री की पूजन, पाद प्रच्छालन, शास्त्र भेंट उत्साह के साथ किया गया। इसके बाद मोक्ष कल्याणक की पूजन की गई। आयोजन के अंतिम दिन विश्व शांति की कामना के साथ विश्व शांति महायज्ञ पूर्णाहुति हवन किया गया। शांतिपाठ और विसर्जन भी किया गया। दोपहर 1.30 बजे से गजरथ महोत्सव में सात फेरी हुयीं जिसे देखने जैन और जैनेतर श्रद्धालुओं का अपार जनसैलाव गौशाला परिसर में आस्था के साथ उमड़ पड़ा। गजरथ फेरी में व्यवस्था को सुचारू ढंग से चलाने के लिए नवांगतुक पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में चप्पे-चप्पे पर पुलिस प्रशासन नजर बनाए था। गजरथ की सात परिक्रमा देखने उमड़े आस्था के भारी जनसैलाव का उत्साह देखते ही बनता था। आचार्यश्री ससंघ गजरथ फेरी में शामिल रहे। गजरथ फेरी देखने जहां अनेक ग्रामों से ग्रामीण हजारों की संख्या में मौजूद रहे वहीं देश के विभिन्न स्थानों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुँचे हुए थे।