ललितपुर

मुहब्बतों का कहीं पर कोई नगर होता, उसी नगर में छोटा सा अपना घर होता

ललितपुर। गुलिस्तान-ए-अदब के तत्वाधान में वरिष्ठ कवियत्री गीता सागर के आवास पर हिन्दू मुस्लिम भाईचारा के नाम से एक शानदार महफिल-ए-मुशायरा हुआ। जिसकी अध्यक्षता जनपद के मशहूर शायर असर ललितपुरी ने की तथा संचालन वरिष्ठ शायर एमआर ने किया। मुख्य अतिथि के रूप में नेमवि के कृषि विभाग के प्रोफेसर मदनलाल उपस्थित हुये। वक्ताओं ने जोर देकर इस बात को कहा कि यदि पूरे देश में लोग साहित्य से जुड़ जायेंगे तो कहीं भी नफरत नहीं फैल सकती, क्योंकि साहित्य हमें मुहब्बत करना सिखाता है। कार्यक्रम के शुरू में सत्तार नजमी ने नाते पाक और गीता सागर ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। गजल का दौर शुरू करते हुये नौजवान शायर चाहत ने कहा, जले या बुझे दीपक कहीं पर भी, उसे तो हवायें चलाने से मतलब। जहीर ललितपुरी ने कहा, मुहब्बतों का कहीं पर कोई नगर होता, उसी नगर में छोटा सा अपना घर होता। अफसर महोबी ने कहा, आप कायम मिसाले वफा कीजिये, हो सके तो सभी का भला कीजिये। संचालन के जौहर दिखाते हुये एमआर ने कहा वो भीख मांगते फुटपाथ पे मिलेंगे हमें, गरीब बच्चे कहाँ अपने घर में रहते हैं। मनीषा सोनी ने कहा, मुसाफिर हम हैं इक सेहरा के लेकिन, जमीं दिल की बहुत नम देखते हैं। असर ललितपुरी ने अनेकों शेर पेश किये, उनका ये शेर काफी पंसद किया गया।