ललितपुर

महावीर जयन्ती की पूर्व बेला पर वैचारिक गोष्ठी संपन्न

ललितपुर। भगवान महावीर स्वामी के 2618 वीं जन्म कल्याणक की पूर्व वेला पर करूणा इण्टरनेशनल के तत्वाधान में सिविल लाइन के परिसर में महावीर की दृष्टि और सोच विषयक विचारमाला के शुभारंभ में ज्ञानदीप प्रज्जवलित करते हुए मुख्य अतिथि नेहरु महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य प्रोफेसर भगवत नारायण शर्मा ने द्वीप प्रज्जवलित कर किया। विचार गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि महिला सशक्तिकरण, स्वच्छता और शुद्धता, जल संरक्षण, वृक्ष लगाओ,जनसंख्या नियंत्रण जैसे अभियान को गति प्रदान करने के लिए भगवान महावीर के सिद्धान्त आज अत्यधिक प्रासंगिक हो गए हैं। भूकंप, सुनामी,आतंकवाद, हिंसा, जातिवाद,लिंगभेद आदि जैसी बुराइयों पर काबू पाने के लिए महावीर स्वामी के सिद्धान्त अत्यन्त उपयोगी हैं। प्रोफेसर शर्मा ने कहा कि कमजोरों छल- बल से जीतकर उनके राज्य को एवं धन को अपने राज्य में या धन अपने खजाने में मिलाना बडा आसान है किंतु लगातार 12 वर्षों तक कठोर तपस्या से अपने शरीर को जीतने वाले महावीर और वर्धमान कहलाते हैं। उनकी शिक्षाओं और सोच पर कभी काल का दाग नहीं लग सकता है।उनका चिंतन तब तक प्रांसगिक रहेगा जब तक श्रमाजित धन का प्रतिफल समाज में समता ,सामंजस्य,संतोष आधारित अति प्राचीन श्रमण संस्कृति की मुर्झाई लता फिर से हरी-भरी न हो जाए। महावीर के सिद्धान्त पहले से कहीं अधिक आज प्रासंगिक हैं। अक्षय जैन ने कहा कि भगवान महावीर का जीवन मानवीय मूल्यों की स्थापना की एक अनवरत और शाश्वत ज्योति की कहानी है। उन्होंने बताया कि एक धर्म आराधना में जाति, वर्ग, लिंग आदि के भेद के लिए कोई स्थान नहीं है। जिनेन्द्र जैन ने कहा कि भगवान महावीर ने अपने जीवन काल में बहुत सी सामाजिक कुरीतियों की समाप्ति और समाज सुधार के लिए सम्यक आस्था, सम्यक ज्ञान और सम्यक आचरण के सिद्धान्तों का प्रयोग किया। नारी सशक्तिकरण को सफल बनाने में महावीर स्वामी के सिद्धान्त उपयोगी हैं। मड़ावरा संयोजक पुष्पेन्द्र जैन ने बताया कि हिंसा, क्रूरता,अत्याचार,असहिष्णुता,अहं से मुक्ति दिलाने और संपूर्ण मानव समाज को दया, अहिंसा, प्रेम जैसी देवी गुणों से परिपूर्ण करने के लिए भगवान महावीर ने अनेक कार्य किये। शीतलचन्द्र जैन ने कहा कि विश्व प्रभु भगवान महावीर अंतस चेतना के संवाहक थे एवं अहिंसक धर्म के परम उदघोषक थे। इस दौरान पूर्व पार्षद राजेन्द्र थनवारा, अजय जैन, राजीव जैन, आनन्द जैन, सन्तोष जैन, पीयूष जैन, धु्रव साहू, सोमचंद्र जैन, दीपक सिंघई, गेंदालाल सतभैया, अमित जैन आदि मौजूद रहे। संचालन पुष्पेंद्र जैन ने किया।