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इंजेक्शन लगने वाली जगह लालिमा, सूजन और चक्कर आना सामान्य बात है

ललितपुर। 26 नवम्बर से शुरू हुए मीजिल्स-रूबेला (एमआर) टीकाकरण अभियान के अंतर्गत जनपद में लगभग 4 लाख 48 हजार बच्चों को एमआर का टीका लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया हैं जिसके सापेक्ष 11 दिनों में लगभग 2 लाख 7 हजार बच्चों का सफल टीकाकरण किया जा चुका है। वही प्रदेश में ढाई करोड़ से अधिक बच्चों का टीका लग चुका हैं। प्रदेश में मीजिल्स-रूबेला (एमआर) टीकाकरण अभियान के दौरान बच्चों के बीमार पडऩे की आ रहीं खबरों के बीच इस अभियान से जुड़ आला अफसरों का कहना है कि यह टीका बच्चों के लिए पूरी तरह से सुरक्षित और बहुत ही फायदेमंद है। इंजेक्शन लगने के भय (इंजेक्शन फोबिया) के चलते बच्चे रोने लगते हैं और इसी डर के चलते वह अपने को बीमार या कमजोर महसूस करने लगते हैं। बच्चों के अन्दर से इसी भय को दूर करने के लिए स्कूलों को स्पष्ट निर्देश हैं कि टीका लगने के दौरान अभिभावक भी मौजूद रहें ताकि बच्चे घबराएं नहीं, अभियान में जुटीं टीमें भी एहतियात बरतें कि यदि किसी बच्चे को गंभीर बीमारी, बुखार आदि है तो उसे टीका इलाज उपरान्त लगाया जाए, इसके अलावा टीकाकरण के दौरान बच्चों को ऐसा माहौल दिया जाए ताकि बच्चे के अन्दर का भय अपने आप खत्म हो जाए। एसीएमओ डा.हुसैन खान ने कहा कि नौ माह से 15 साल तक के बच्चों को लगने वाला एमआर टीका पूर्ण रूप से सुरक्षित हैं। इस टीके के जरिये बच्चों को खसरा और रूबेला जैसी खतरनाक बीमारियों से बचाया जा सकता है। उन्होने बताया कि खसरा से ज्यादा रूबेला खतरनाक होता हैं। क्योंकि लड़कियों के साथ भविष्य में उनके मां बनने के दौरान रूबेला से संक्रमण के कारण गर्भपात का खतरा बना रहता हैं तथा गर्भवती महिला से पैदा होने वाले बच्चे में संक्रमण होने से बच्चे में सी.आर.एस. (कंजेनाइटल रूबेला सिंड्रोम) होने का खतरा होता हैं, जिससे जन्म लेने वाले शिशु जन्मजात ह्रदय रोग, बहरापन, अंधापन, मानसिक रोग जैसी गंभीर बीमारियों से ग्रस्त होते हैं।