Uncategorized

गृह आधारित नवजात शिशु की देखभाल, पूरे एक साल

ललितपुर। एक नवजात शिशु को किसी तरह पहले 24 घंटों की सुरक्षा तो मिल जाती लेकिन उसके बाद भी नवजात की विशेष देखभाल जरुरी होती है। प्रसव के बाद आशाएँ 42 दिन तक 6 से 7 बार गृह भ्रमण कर नवजात शिशुओं और माताओं की देखभाल सुनिश्चित करती है। साथ ही में नवजात शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य से अब एचबीएनसी (होम बेस्ड न्यूबोर्न केयर) कार्यक्रम के अंतर्गत अतिरिक्त चार गृह भ्रमण (तीसरे, छटे, नौवें एवं 12वें माह) करने का प्रावधान किया गया है, जिसमें आशाएँ एसएनसीयू (सिक न्यूबोर्न केयर) से छुटटी पाये हुये, बीमार तथा कम वजन वाले शिशुओं के बेहतर स्वास्थ्य और पोषाहार के लिए परामर्श और जागरूक कर रही है।
इसके साथ ही जनपद की सभी आशाओं को लगातार प्रशिक्षित किया जा रहा है, जिससे वह एसएनसीयू से छुट्टी पाये हुये तथा कम वजन वाले शिशुओं को 3 माह से 1 वर्ष तक गृह भ्रमणकर देखभाल सुनिश्चित कर सकें। इस कार्य के लिए आशाओं को चार गृह भ्रमण पूर्ण होने के उपरांत यदि शिशु जीवित रहता है तो 200 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के सहयोग से गंभीर नवजात शिशुओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान कराने, घर पर नवजात शिशुओं की उचित देखभाल करने तथा बीमार नवजात शिशुओं का समय से इलाज सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एचबीएनसी (गृह आधारित नवजात शिशु देखभाल) कार्यक्रम चलाया जा रहा है। यूनिसेफ के झाँसी डिवीजनल मॉनिटर सुनील चौधरी ने बताया कि 42 दिन तक गृह भ्रमण के अतिरिक्त चार गृह भ्रमण जनपद झाँसी सहित 19 और जिलों में 2016 से किया जा रहा है और 2017 से प्रदेश के बाकी जिलों में भी कार्यरत है। उन्होने बताया कि आशायें एसएनसीयू से छुट्टी पाये हुये शिशुओं की देखभाल प्रसव के बाद 3, 7, 14, 21, 28 और 42वें दिन गृह भ्रमण करके करती हैं। वहीं अब इन भ्रमणों के पूर्ण होने पर वह तीसरे माह से प्रत्येक त्रिमाही क्रमश: 3, 6, 9, एवं 12 माह पर भी गृह भ्रमण करके बच्चों की देखभाल करती है। उन्होने बताया कि यह गतिविधि पिछले दो सालों से प्रदेश के सभी जिलों में कार्यरत है। इन अतिरिक्त चार भ्रमणों का उद्देश्य, नवजात शिशु में आशाओं द्वारा छ: माह तक सिर्फ स्तनपान को बढ़ावा देना, नियमित व सम्पूर्ण टीकाकरण के लिए प्रोत्साहित करना, छ: माह के बाद स्तनपान के साथ साथ पूरक आहार को बढ़ावा देना, कम वजन वाले अथवा समय से पूर्व जन्में शिशुओं को स्तन द्वारा निकाले हुये दूध को कटोरी एवं चम्मच की मदद से पिलाने के बारे में घर वालों को प्रशिक्षित करना, बच्चों में डायरिया एवं निमोनिया से बचाव के विषय में जानकारी देना आदि गतिविधियों के बारे जागरूक व प्रोत्साहन करना है। प्रधानमंत्री ने भी ट्वीट के द्वारा कहा कि एचबीएनसी के माध्यम से हर वर्ष सवा करोड़ बच्चों की देखभाल आशाओं के द्वारा की जा रही है। आशाओं की मेहनत से यह कार्यक्रम सफल भी हो रहा है जिसके कारण इसको और विस्तार दिया गया है। अब इसको होम बेस्ड चाइल्ड केयर का नाम दिया गया है। सुनील चौधरी ने बताया कि अप्रैल 2018 में होम बेस्ड यंग चाइल्ड केयर (एचबीवाईसी) के दिशानिर्देशों के अनुसार आगे आने वाले समय में आशा और आंगनबाड़ी साथ मिलकर तीसरे माह से लेकर जीवन के दूसरे वर्ष यानि 15 माह तक अतिरिक्त पाँच गृह भ्रमण (तीसरे, छटे, नौवें, 12वें एवं 15वें माह) करेंगी, और यदि पांचों गृह भ्रमण के पूर्ण होने पर शिशु जीवित रहता है तो उनको 200 रुपये का मानदेय दिया जाएगा। इसमें आशा और आंगनबाड़ी स्वास्थ्य, स्वच्छता और पोषण से संबन्धित गतिविधियों को माताओं और परिवार के सदस्यों को बताएँगी तथा नवजात शिशु के बेहतर स्वास्थ्य और पोषण के लिए प्रोत्साहन का कार्य भी करेंगी। बिरधा ब्लॉक के पट सिमरा गाँव की आशा लक्ष्मी देवी ने बताया कि काफी समय पहले जब वह गृह भ्रमण के लिए जाती थी तो गाँव के लोग उनकी बातों को सुनने के लिए तैयार नहीं होते थे। वह बोलते थे कि आप कोई डॉक्टर हो क्या जो हम आपकी बात सुने। लेकिन लगातार गृह भ्रमण के दौरान बच्चों एवं माताओं की देखभाल करने से गाँव वालों में बहुत अधिक बदलाव आया है। अब समय यह है कि गाँव के लोग आशा लक्ष्मी कि बात बहुत आराम से सुनते है और उस पर अमल करते है। लक्ष्मी बताती है कि इन चार अतिरिक्त गृह भ्रमण के दौरान हाथ धोने, वजन लेने के साथ ही टीकाकरण, छ: माह तक सिर्फ स्तनपान, पूरक आहार आदि के बारे जानकारी देती है और प्रत्येक त्रिमाही नवजात शिशु का फॉलो-अप भी करती है। वह बताती है कि कम वजन के बच्चों एवं उनकी माओं को बहुत अधिक देखभाल की जरूरत होती है, इसीलिए ऐसे बच्चों की देखभाल लगातार एक साल तक की जाती है जिससे उनके स्वास्थ्य में सुधार हो सके और साथ ही उनके वजन में बढ़ोत्तरी हो सके।