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गौवंश पर उपयोग किया जायेगा वर्गीकृत वीर्य

ललितपुर। उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश में बेसहारा एवं निराश्रित गौवंश की समस्या के समाधान हेतु एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। चूंकि कृषि कार्य में मशीनीकरण के कारण स्वदेशी-अवर्णित गौवंश के नर वत्स का कृषि में उपयोग लगभग समाप्त हो गया है। तथा अन्ना गौवंश के रूप में इनकी संख्या सर्वाधिक है। साथ ही अवर्णित नस्ल की गायें बहुत ही कम मात्रा में दूध देती हैं। अत: अन्ना गोवंश की संख्या बढाने में इनका भी प्रमुख स्थान है। इन दोंनो प्रमुख कारकों को दृष्टगत रखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने पूरे प्रदेश में सैक्स सोरटिड सीमेन (वर्गीकृत वीर्य) के उपयोग हेत राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (भारत सरकार) के वित्तीय सहयोग से इस वर्गीकृत वीर्य के प्रयोग हेतु शासना देश संख्या 4128/सैतीस-2-2018-1(49)/2007 दिं0 07 दिसम्बर 2018 जारी कर दिया है। इस वर्गीकृत वीर्य के प्रयोग करने से 90 मादा बछिया ही उत्पन्न होंगी तथा शेष 10 नर वत्स होंगे। यह 10 नर वत्स उच्च गुणवत्ता वाले होंगे जिनका प्रयोग भारत सरकार द्वारा निर्गत मानकों (एम.एस.पी.) के अनुरूप अतिहिमीकृत वीर्य उत्पादन केन्द्रो व नैसर्गिक अभिजनन हेतु किया जाएगा।