झांसी

कुंभ में बुंदेली गीतों से कलाकारों ने बांधा समां

झाँसी। प्रयागराज में कुम्भ महोत्सव 2019 में संस्कार भारती एवं उ.प्र. संगीत नाटक एकाडमी के उपसभापति डा. धन्नूलाल गौतम के सानिध्य में संस्कृति विभाग उ.प्र. प्रयागराज के सेक्टर-13 में सरस्वती मंच पर श्री गणेश, बुन्देलखण्डी गम्मत मण्डल-झांसी उ.प्र. के सीताराम कुशवाहा के निर्देशन में कलाकारों ने बुंदेली परिधान में बुंदेली बाध्य यंत्रों के साथ सर्वप्रथम बुंदेली गणेश वंदना, सुमंरू गणेश शारदा माई, झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई पर देशक्ति गीत-महारानी झाँसी की रानी रण में जौहर पारें, जब किसान माघ-मास में अपने खेतों की फसल को देखकर खुश होकर लम्टेरा गीत-महादेव बाबा बड़े रसिया रे गाता है। उपरोक्त सभी गीतों पर लोक नृत्य के साथ प्रस्तुति दी एवं अंत में उ.प्र. संगीत नाटक एकाडमी के उपसभापति डा. धन्नूलाल गौतम ने महाकवि स्व. अवदेश जी की रचना यह बुन्देल धरा है, यह बुन्देल धरा है गीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में सीताराम कुशवाहा नगडिय़ा, महेश कुशवाहा लोटा, बाल कलाकार रिषि कुशवाहा रमतुला-खंजड़ी-अंग्रेज, जीवन परिहार बांसुरी, रमेश मास्टर मृदंग, रामकिशुन मास्टर हारमोनियम, कमलेश वर्मा नृत्यकार-गायक, वलिराम वर्मा जोकर, अतर सिंह ठोलक, सुबोध खरे झीका, कु.शिवानी शाक्या महारानी लक्ष्मीबाई, श्रीमती किरन गुप्ता महिला प्रमुख ने भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन पूर्व राष्ट्रीय संयोजक लोक विधा अयोध्या प्रसाद कुमुद ने किया। कार्यक्रम के अंत में संस्कृति विभाग द्वारा पुरस्कृत किया गया।